मोहब्बत में मैंने क्या कुछ नहीं लुटा दिया...
उस को पसंद थी रौशनी और मैंने खुद
को जला दिया..
उस को पसंद थी रौशनी और मैंने खुद
को जला दिया..
सोचा था इस कदर उनको भूल
जायेंगे,
..
उनको देख कर भी अंदेखा कर
जायेंग़े,
..
पर जब जब सामने आया उनका चेहरा,
..
तो सोचा इस बार देख ले अगली बार
भूल जायेंगे|
जायेंगे,
..
उनको देख कर भी अंदेखा कर
जायेंग़े,
..
पर जब जब सामने आया उनका चेहरा,
..
तो सोचा इस बार देख ले अगली बार
भूल जायेंगे|
हाथ पकड़ ले अब भी तेरा हो सकता हूँ
भीड़ बहुत है, इस मेले में खो सकता हूँ
भीड़ बहुत है, इस मेले में खो सकता हूँ
आजकल ख़ामोश सा मंजर है यहाँ…!!
कहीं इश्क़ तो नहीं हो गया सबको…
कहीं इश्क़ तो नहीं हो गया सबको…
कभी है प्यार से शिकवा,
कभी नफरत से गिला है ।
बता ऐ ज़िंदगी तू ही,
मुझे तुझसे क्या मिला है !!
कभी नफरत से गिला है ।
बता ऐ ज़िंदगी तू ही,
मुझे तुझसे क्या मिला है !!

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