Thursday, June 26, 2014

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गली के कोने पर बहुत देर से खड़े एक
आदमी को पुलिसवाले ने
पकड़ लिया और पूछा तेरा नाम क्या है
आदमी - शेर सिंह
पुलिसवाला - बाप का नाम
आदमी - बाघेंद्र सिंह
पुलिसवाला - कहाँ जा रहा है
आदमी - शेरा वाली गली में
पुलिसवाला - शेरा वाली गली में किधर
आदमी - टाइगर मेनसन्
(
पुलिसवाला सोचता है हद है यार शेर से नीचे
तो बात
ही नही करता है)
पुलिसवाला - टाइगर मेनसन् में किसके घर
आदमी - सिंघानिया जी के घर
पुलिसवाला - सिंघानिया जी का क्या काम है
आदमी - बाघमारे जी का संदेशा देना है
पुलिसवाला - क्या संदेशा है
आदमी - बाघेला जी ने
पार्टी छोड़ दी है
(
पुलिसवाला एक साथ इतने सारे शेर, हद है यार शेर से
नीचे
तो बात ही नही करता है)
पुलिसवाला -एक बात बता ये जो हाथ में थैले में क्या है
आदमी - आटा
पुलिसवाला - कैसा आटा
आदमी - सिंघाड़े का
(
पुलिसवाला बड़ा जंट आदमी है शेर से
नीचे तो बात
ही नही करता है)
पुलिसवाला - अब मैं तुझ से सवाल पूछता हूँ अगर उसमें
भी शेर
आए तो मानुंगा. अच्छा ये बता अभी तू कहाँ से
रहा है
आदमी - लायंस क्लब
की मीटिंग से
पुलिसवाला - तो फिर तू जाता क्यूँ नहीं है?
यहाँ क्यूँ
खड़ा है इतनी देर से??
आदमी - वो सामने दो कुत्ते भौंक रहे हैं कैसे
निकलूं ?


Wednesday, June 25, 2014

दिल के टूटने पर भी हसना

''दिल के टूटने पर भी हसना ...शायद ज़िंदादिली इसे कहते है .
ठोकर लगने पर भी मंजिल तक भटकना ,
शायद तलाश इसी को केहते है .
किसी को चाह कर भी ना पाना ,
शायद चाहत इसी को कहते है।
टूटे खहनडरो मैं बिना तेल के दिये जलाना शायद उम्मीद इसी को कहते है।
गिर जाने पर भी फिर से खड़ा हो जाना ,
शायद हिमम्त इसे ही कहते है 
ओर ये उम्मीद ,तलाश, हिमम्त ,चाहत,.......
''
शायद जिंदगी इसी को कहते है''